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शादी का झांसा केस में छात्र को जमानत, कोर्ट ने FIR में 7 माह की देरी को माना अहम

By: डिजिटल डेस्क

On: Thursday, June 4, 2026 11:22 PM

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सिंगरौली जिला न्यायालय से शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में एक अहम फैसला सामने आया है। द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, सिंगरौली मुख्यालय बैढ़न श्रीमती कंचन गुप्ता की अदालत ने आरोपी छात्र सूरज कुमार वैश्य को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में FIR दर्ज कराने में हुई करीब सात महीने की देरी, दोनों पक्षों की पूर्व पहचान और आरोपी की शैक्षणिक स्थिति को महत्वपूर्ण आधार माना।

यह आदेश 26 मई 2026 को पारित किया गया। मामला थाना बैढ़न अंतर्गत चौकी सासन क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, कॉलेज छात्रा ने 19 मई 2026 को शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि कॉलेज आने-जाने के दौरान उसकी पहचान सूरज कुमार वैश्य से हुई थी और बाद में युवक ने शादी का वादा कर उससे संबंध बनाए।

कटहल के पेड़ के पास संबंध बनाने का आरोप

एफआईआर के अनुसार, 8 अक्टूबर 2025 की रात आरोपी कथित रूप से छात्रा के घर पहुंचा, जब उसके माता-पिता घर पर नहीं थे। शिकायत में कहा गया कि आरोपी उसे घर के पास कटहल के पेड़ के पास ले गया और शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब युवती ने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी टालमटोल करने लगा।

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पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि मई 2026 में दोबारा शादी की बात करने पर आरोपी ने उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी तथा मोबाइल बंद कर लिया। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 351(3) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को 20 मई 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

बचाव पक्ष ने परीक्षा और पूर्व शिकायत का दिया हवाला

आरोपी की ओर से अधिवक्ता विनय कुमार यादव ने अदालत में दलील दी कि सूरज कुमार वैश्य एक नियमित छात्र है और राजीव गांधी कॉलेज बैढ़न से पीजीडीसीए (PGDCA) की पढ़ाई कर रहा है। उसकी मुख्य परीक्षाएं 26 मई से शुरू हो रही थीं और जेल में रहने से उसका पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता था। बचाव पक्ष ने अदालत में परीक्षा समय-सारणी और प्रवेश पत्र भी प्रस्तुत किए।

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इसके अलावा बचाव पक्ष ने दावा किया कि युवती और उसके परिजन आरोपी पर शादी के लिए दबाव बना रहे थे। इस संबंध में आरोपी द्वारा FIR दर्ज होने से पहले 13 और 16 मई 2026 को पुलिस अधीक्षक सिंगरौली को लिखित शिकायत दिए जाने की पावती भी अदालत में पेश की गई।

कोर्ट ने किन बिंदुओं को माना अहम

सुनवाई के दौरान पीड़िता पक्ष और लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध करते हुए मामले को गंभीर बताया। हालांकि अदालत ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोपी और पीड़िता दोनों वयस्क हैं तथा पहले से एक-दूसरे को जानते थे।

न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि कथित घटना के लगभग सात महीने बाद रिपोर्ट दर्ज की गई। कोर्ट ने कहा कि संबंध सहमति से बने थे या नहीं, यह ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय होगा। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और ट्रायल पूरा होने में समय लग सकता है।

इन शर्तों पर मिली जमानत

अदालत ने आरोपी छात्र को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया कि आरोपी न्यायालय में नियमित उपस्थित रहेगा, किसी भी गवाह या साक्ष्य को प्रभावित नहीं करेगा और भविष्य में ऐसा कोई अपराध दोबारा नहीं करेगा।

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