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सिंगरौली कोर्ट का बड़ा फैसला, SC-ST एक्ट मामले में DGM की अग्रिम जमानत खारिज

By: डिजिटल डेस्क

On: Friday, June 5, 2026 1:05 AM

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सिंगरौली जिला न्यायालय ने अनुसूचित जनजाति समुदाय के एक ग्रामीण के साथ कथित मारपीट और जातिसूचक अपमान के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (SC-ST एक्ट) की अदालत ने मधुकान कंपनी के अधिकारी विनीत पांडेय की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया एससी-एसटी एक्ट के गंभीर प्रावधान लागू होते हैं, इसलिए आरोपी को अग्रिम राहत नहीं दी जा सकती।

यह आदेश 25 मई 2026 को श्रीमती कंचन गुप्ता की अदालत द्वारा पारित किया गया। मामला थाना नवानगर क्षेत्र स्थित एनसीएल निगाही रेलवे ट्रैक इलाके से जुड़ा है।

लकड़ी बीनने गए आदिवासी दंपती से मारपीट का आरोप

अभियोजन पक्ष के अनुसार, फरियादी अन्नेलाल बैगा अपनी पत्नी देवसिया बैगा के साथ 20 मार्च 2026 को रेलवे ट्रैक के पास सूखी लकड़ी बीनने गए थे। आरोप है कि उसी दौरान बजरंग सिक्योरिटी से जुड़े लोग और मधुकान कंपनी के अधिकारी वहां पहुंचे और उन पर कबाड़ चोरी का आरोप लगाने लगे।

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शिकायत में कहा गया है कि विरोध करने पर अन्नेलाल बैगा को जातिसूचक शब्द कहे गए और हॉकी स्टिक तथा लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा गया। पीड़ित के अनुसार, घटना के दौरान कंपनी अधिकारी विनीत पांडेय कथित रूप से मौजूद थे और गार्ड्स को “पैर के नीचे मारो” कहकर उकसा रहे थे। हमले में पीड़ित के पैर में गंभीर चोट आई।

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 115(2), 351(3), 3(5) तथा एससी-एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था।

आरोपी पक्ष ने प्रतिष्ठा और पारिवारिक जिम्मेदारी का दिया हवाला

आरोपी विनीत पांडेय की ओर से अधिवक्ता महेंद्र पांडेय और रावेंद्र देव पांडेय ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल मधुकान कंपनी में डीजीएम पद पर कार्यरत हैं और समाज में प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के निवासी हैं और उनके फरार होने की संभावना नहीं है।

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याचिका में यह भी कहा गया कि आरोपी अपने वृद्ध माता-पिता के इकलौते सहारा हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। दूसरी ओर, विशेष लोक अभियोजक संजीव सिंह ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी को अग्रिम राहत मिलने से मामले के साक्ष्य और गवाह प्रभावित हो सकते हैं।

कोर्ट ने कहा- SC-ST एक्ट में अग्रिम जमानत का प्रावधान सीमित

सुनवाई के दौरान अदालत ने केस डायरी का अवलोकन किया और पाया कि मामले के अन्य सह-आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि विनीत पांडेय घटना के बाद से फरार बताए गए हैं।

विशेष न्यायाधीश श्रीमती कंचन गुप्ता ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि एससी-एसटी एक्ट की धारा 18 के तहत यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है, तो अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को अपोषणीय मानते हुए निरस्त कर दिया।

पुलिस को आगे की कार्रवाई के निर्देश

अदालत ने आदेश की प्रति और केस डायरी संबंधित थाना पुलिस को वापस भेजते हुए फरार आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश एससी-एसटी एक्ट के मामलों में अदालतों की सख्त संवेदनशीलता और पीड़ित संरक्षण के दृष्टिकोण को दर्शाता है।

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