सिंगरौली जिला न्यायालय से शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, सिंगरौली मुख्यालय बैढ़न श्रीमती कंचन गुप्ता की अदालत ने आरोपी युवक राहुल Kumar शाह को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में मामले की परिस्थितियों, दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और पीड़िता के पहले से विवाहित होने जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना।
यह आदेश 27 मई 2026 को पारित किया गया। मामला विंध्यनगर थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि पड़ोस में रहने वाला राहुल कुमार शाह पिछले पांच वर्षों से उसके संपर्क में था और दोस्ती के दौरान उसने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।
पति की बीमारी के बाद बढ़ी नजदीकियां
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वर्ष 2025 में पीड़िता के पति की तबीयत खराब होने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसे यह कहकर अपने करीब किया कि उसका पति नपुंसक है और वह उससे शादी करेगा। शिकायत में कहा गया कि 25 अप्रैल 2025 को आरोपी पहली बार उसके घर पहुंचा और शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद आरोपी कथित रूप से पति को जानकारी देने की धमकी देकर लगातार संबंध बनाता रहा।
चेक बाउंस मामले में कोर्ट सख्त, आरोपी के खिलाफ समंस जारी
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि 4 अप्रैल 2026 को जब उसके पति को इस संबंध की जानकारी हुई तो उसने उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद आरोपी ने भी शादी से इनकार कर दिया। पुलिस ने आरोपी राहुल शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 332(B) के तहत मामला दर्ज किया था।
बचाव पक्ष ने बताया झूठा मामला
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश शुक्ला ने अदालत में दलील दी कि मामला रंजिश के चलते दर्ज कराया गया है। बचाव पक्ष ने दावा किया कि पीड़िता का पति अवैध गांजा व्यापार से जुड़ा है और वह आरोपी पर गैरकानूनी गतिविधियों में सहयोग का दबाव बना रहा था। मना करने पर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
डिजिटल साक्ष्यों की प्रमाणिकता साबित होना जरूरी, आरोपी नियमित जमानत
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पीड़िता ने स्वयं FIR में स्वीकार किया है कि वह आरोपी को पांच वर्षों से जानती थी और उससे नियमित बातचीत करती थी। आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है।
कोर्ट ने किन आधारों पर दी राहत
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि पीड़िता एक बालिग और विवाहित महिला है। न्यायालय ने यह भी नोट किया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से मित्रवत संबंध थे और कथित घटना के लगभग एक महीने बाद FIR दर्ज की गई।
अदालत ने यह भी माना कि आरोपी करीब एक महीने से न्यायिक हिरासत में है और ट्रायल पूरा होने में पर्याप्त समय लग सकता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत आरोपी की नियमित जमानत मंजूर कर ली।
इन शर्तों पर मिली जमानत
अदालत ने आरोपी को 20 हजार रुपये के मुचलके और समान राशि की जमानत प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही यह शर्त लगाई गई कि आरोपी ट्रायल के दौरान नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहेगा और किसी भी गवाह या साक्ष्य को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा।







