भारत में पिछले कुछ दिनों से एलपीजी आपूर्ति को लेकर जो चिंता बढ़ रही थी, उसके बीच एक सकारात्मक खबर सामने आई है। एलपीजी से लदा “शिवालिक” नाम का कार्गो जहाज ईरान के बेहद संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर चुका है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकार मान रहे हैं कि इस जहाज के भारत पहुंचते ही घरेलू गैस की सप्लाई में आई अस्थायी बाधा धीरे-धीरे खत्म हो सकती है।
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क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा भाग आयात के जरिए पूरा करता है, उसके लिए यह मार्ग बेहद अहम है।
ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक, हाल के दिनों में इस क्षेत्र में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और जहाजों की आवाजाही पर अस्थायी असर के कारण भारत आने वाली कुछ एलपीजी खेपों में देरी हुई थी। यही वजह थी कि कुछ राज्यों में गैस एजेंसियों पर डिलीवरी समय बढ़ने की शिकायतें भी सामने आईं।
शिवालिक जहाज के पहुंचने से क्या बदलेगा
“शिवालिक” नामक एलपीजी कैरियर जहाज में हजारों टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) लदी हुई है। ऊर्जा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह खेप घरेलू वितरण नेटवर्क के लिए अहम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही यह जहाज भारत के बंदरगाह पर पहुंचेगा, वहां से एलपीजी को रिफाइनरी और बॉटलिंग प्लांट तक भेजा जाएगा। इसके बाद सिलेंडर भरकर अलग-अलग राज्यों में सप्लाई शुरू हो जाएगी।
ऊर्जा बाजार के जानकार बताते हैं कि भारत में रोजाना लाखों घरेलू सिलेंडरों की खपत होती है। ऐसे में सप्लाई चेन का थोड़ी देर के लिए भी बाधित होना स्थानीय स्तर पर गैस की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है। इस नई खेप से वही अंतर भरने में मदद मिलेगी।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए संकेत
इस घटनाक्रम को केवल एक जहाज के आने तक सीमित नहीं माना जा रहा। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ इसे भारत की ऊर्जा आपूर्ति रणनीति के व्यापक संदर्भ में भी देख रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने गैस आयात के स्रोतों को विविध बनाने, स्टोरेज क्षमता बढ़ाने और बंदरगाह इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। इसका मकसद यही है कि अगर किसी अंतरराष्ट्रीय मार्ग या क्षेत्र में अस्थायी संकट आए, तब भी घरेलू बाजार पर उसका असर कम से कम हो।







