कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच चुनावी सरगर्मी अब कानूनी गलियारों तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी और चुनाव आयोग द्वारा तैनात किए गए पुलिस ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। उन पर चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं को धमकाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
अप्रैल 2026 में जारी मतदान के चरणों के दौरान, चुनाव आयोग ने कानून व्यवस्था की निगरानी के लिए अजय पाल शर्मा को पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त कर बंगाल भेजा था। आरोप है कि उन्होंने अपनी निर्धारित शक्तियों का उल्लंघन करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को कथित तौर पर डराया-धमकाया।
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याचिकाकर्ताओं का दावा है कि एक विशेष विधानसभा क्षेत्र में छापेमारी के दौरान आईपीएस शर्मा ने बिना किसी ठोस वारंट या चुनाव आयोग के लिखित आदेश के, राजनीतिक कार्यकर्ताओं के घरों में तलाशी अभियान चलाया। इसी को आधार बनाकर कलकत्ता हाईकोर्ट में उन्हें पद से हटाने और उनके कार्यों की न्यायिक जांच की मांग की गई है।
कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर याचिका के मुख्य बिंदु
कोर्ट में दायर की गई इस याचिका में निम्नलिखित तीन प्रमुख आपत्तियां दर्ज की गई हैं:
- अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: ऑब्जर्वर का काम रिपोर्ट करना है, न कि सीधे तौर पर छापेमारी या पुलिसिया कार्रवाई में नेतृत्व करना।
- आचार संहिता का उल्लंघन: आरोप है कि उनके आचरण से निष्पक्ष चुनाव की धारणा प्रभावित हो रही है।
- पक्षपात का आरोप: याचिका में कहा गया है कि उनकी कार्रवाई केवल एक ही राजनीतिक दल के खिलाफ केंद्रित थी।
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अजय पाल शर्मा का विवादों से पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब अजय पाल शर्मा सुर्खियों में हैं। ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में मशहूर इस आईपीएस अधिकारी पर पूर्व में उत्तर प्रदेश में भी भ्रष्टाचार और ‘कैश फॉर पोस्टिंग’ जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। हालांकि, उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए चुनाव आयोग ने उन्हें इस संवेदनशील जिम्मेदारी के लिए चुना था, लेकिन अब बंगाल की राजनीति में उनकी मौजूदगी ने नया तूफान खड़ा कर दिया है।
चुनाव आयोग और सरकार का रुख
फिलहाल, भारतीय चुनाव आयोग ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, आयोग हाईकोर्ट के रुख और मामले की मेरिट का इंतजार कर रहा है। वहीं, स्थानीय प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
चुनाव पर क्या होगा असर?
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही एक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कोर्ट में याचिका जाने से चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। यदि कोर्ट अजय पाल शर्मा के खिलाफ कोई सख्त टिप्पणी करता है या उन्हें वापस भेजने का आदेश देता है, तो यह चुनाव आयोग के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।







