भोपाल। बैंकिंग क्षेत्र में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ एक कड़ा उदाहरण पेश करते हुए भोपाल स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। बैंक ऑफ इंडिया (BOI) की मिसरोद शाखा में हुए 27 लाख रुपये के लोन घोटाले में दोषी पाए गए तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर और उनके सहयोगी को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है।
विश्वासघात और धोखाधड़ी का पूरा मामला
यह मामला साल 2016 का है, जब बैंक ऑफ इंडिया की मिसरोद शाखा के तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रख दिया था। जांच में पाया गया कि प्रबंधक ने एक निजी व्यक्ति के साथ मिलकर साज़िश रची और एक फर्जी फर्म के नाम पर 27 लाख रुपये का टर्म लोन स्वीकृत कर दिया।
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हैरानी की बात यह थी कि जिस उद्देश्य के लिए लोन लिया गया था, वह राशि वहां न जाकर सीधे सह-आरोपी के परिवार से जुड़ी एक अन्य कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इस हेराफेरी से न केवल बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि सार्वजनिक धन का व्यक्तिगत लाभ के लिए दुरुपयोग किया गया।
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CBI की जांच और सजा का विवरण
CBI ने इस मामले में गहनता से जांच की और पाया कि लोन की मंजूरी में केवाईसी (KYC) नियमों और सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई थी। 1 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया:
- सजा: दोनों आरोपियों को 7-7 साल का कठोर कारावास।
- जुर्माना: अदालत ने दोनों दोषियों पर 60-60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
बैंकिंग प्रणाली के लिए एक कड़ा संदेश
हाल के वर्षों में भारत में बैंकिंग धोखाधड़ी के खिलाफ सख्ती बढ़ी है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और आरबीआई की रिपोर्ट बताती हैं कि आंतरिक मिलीभगत से होने वाले फ्रॉड बैंकिंग साख के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि CBI कोर्ट का यह फैसला उन अधिकारियों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो पद की गरिमा भूलकर भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की सख्त सजा से आम जनता का बैंकिंग व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होता है। यह स्पष्ट संदेश देता है कि वित्तीय अनियमितताओं और सार्वजनिक धन की लूट के मामलों में कानून का हाथ बहुत लंबा है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
नोट: इस फैसले के बाद बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय ने भी आंतरिक ऑडिट और लोन सैंक्शनिंग प्रक्रियाओं को और अधिक कड़ा करने के निर्देश दिए हैं।







