कोलंबो/नई दिल्ली–भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्तों में आज एक सुनहरा अध्याय जुड़ गया। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपनी श्रीलंका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। इस मुलाकात ने न केवल कूटनीतिक गर्मजोशी दिखाई, बल्कि ज़मीनी स्तर पर मानवीय सहायता की भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
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50,000वें घर का उद्घाटन- एक ऐतिहासिक उपलब्धि
इस यात्रा का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण क्षण वह था जब उपराष्ट्रपति ने श्रीलंकाई तमिल समुदाय के लिए भारतीय सहायता से निर्मित 50,000वें आवास का वर्चुअली उद्घाटन किया।
- परियोजना का विवरण- यह ‘भारतीय आवास परियोजना’ (Indian Housing Project) का हिस्सा है, जिसे विशेष रूप से वृक्षारोपण क्षेत्रों और युद्ध प्रभावित उत्तर-पूर्वी प्रांतों में रहने वाले लोगों के लिए शुरू किया गया था।
- कुल लक्ष्य- भारत अब तक श्रीलंका में लगभग 60,000 घरों के निर्माण का वादा कर चुका है, जिनमें से 50,000 का आंकड़ा पार करना एक बड़ी उपलब्धि है।
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आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी
राष्ट्रपति दिसानायके के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में आर्थिक संकट से उबर रहे श्रीलंका की मदद पर विशेष चर्चा हुई। भारत ने श्रीलंका के डिजिटल बुनियादी ढांचे (Digital Stack) और नवीकरणीय ऊर्जा (विशेषकर मन्नार बेसिन में पवन ऊर्जा) के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ाने का आश्वासन दिया।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा, “श्रीलंका भारत के लिए केवल एक पड़ोसी नहीं, बल्कि हमारी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का एक अहम स्तंभ है। 50,000 घरों का पूरा होना सिर्फ ईंट-पत्थर की कहानी नहीं, बल्कि विश्वास और साझा विकास की कहानी है।”
भविष्य की राह
भारत ने श्रीलंका को $4 बिलियन से अधिक की वित्तीय सहायता पिछले कुछ वर्षों में प्रदान की है, जो किसी भी अन्य देश द्वारा दी गई सहायता से कहीं अधिक है। आज की वार्ता में कोलंबो बंदरगाह के विकास और दोनों देशों के बीच यूपीआई (UPI) भुगतान व्यवस्था को और विस्तार देने पर भी सहमति बनी है।







