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भारत और दक्षिण कोरिया के बीच ‘विशेष सामरिक साझेदारी’ का नया अध्याय

By: डिजिटल डेस्क

On: Monday, April 20, 2026 1:23 PM

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नई दिल्ली-राजधानी के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में आज वैश्विक राजनीति की एक महत्वपूर्ण हलचल देखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह मुलाकात न केवल औपचारिक थी, बल्कि इसमें भविष्य की तकनीक और सुरक्षा की एक गहरी रूपरेखा छिपी हुई थी।

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तकनीक और रक्षा पर केंद्रित रही बातचीत

इस शिखर सम्मेलन का मुख्य आकर्षण सेमीकंडक्टर और एआई (AI) के क्षेत्र में सहयोग रहा। दक्षिण कोरिया, जो चिप निर्माण में दुनिया का दिग्गज है, भारत के ‘सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में उभरा है। दोनों देशों ने उन्नत चिप डिजाइन और निर्माण के लिए एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

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रक्षा क्षेत्र में, K9 वज्र (K9 Vajra) तोपों की सफलता के बाद अब ‘मेक इन इंडिया’ के तहत जहाज निर्माण (Shipbuilding) और उन्नत सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन पर सहमति बनी है। राष्ट्रपति ली ने स्पष्ट किया कि कोरिया भारत के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

आर्थिक आंकड़े और लक्ष्य

दोनों नेताओं ने व्यापार घाटे को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। वर्तमान में यह व्यापार लगभग 25.7 बिलियन डॉलर के आसपास है।

शांति का संदेश और समुद्री सुरक्षा

हैदराबाद हाउस के प्रांगण में दोनों नेताओं ने शांति के प्रतीक के रूप में एक पौधा लगाया, जो दोनों देशों के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। साथ ही, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव को देखते हुए समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर भी विस्तृत चर्चा हुई।यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के लिए मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि दक्षिण कोरिया अब भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक वैश्विक उत्पादन केंद्र (Global Production Hub) के रूप में देख रहा है।

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