नई दिल्ली- भारतीय राजनीति के गलियारे में आज उस वक्त भूकंप आ गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पाला बदलते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ले ली। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी के लिए इसे अब तक का सबसे बड़ा सांगठनिक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
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दिग्गज चेहरों की बगावत
सूत्रों के मुताबिक, पाला बदलने वाले सांसदों में पार्टी के सबसे प्रखर चेहरे राघव चड्ढा और रणनीतिकार संदीप पाठक के नाम शामिल हैं। इनके अलावा पांच अन्य सांसदों के इस कदम ने राज्यसभा में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है। वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सदस्य थे, जिनमें से 7 के चले जाने से अब सदन में पार्टी के पास केवल 3 सांसद रह गए हैं।
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क्या कहता है कानून?
इस घटनाक्रम के बाद अब सबकी नजरें ‘दलबदल विरोधी कानून’ (Anti-Defection Law) और राज्यसभा सभापति के रुख पर टिकी हैं। संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ टूटकर किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं होता। AAP के मामले में 10 में से 7 सांसदों का जाना इस तकनीकी आंकड़े (6.66) को पार करता दिख रहा है, जिससे उनकी सदस्यता सुरक्षित रह सकती है।
BJP और AAP की प्रतिक्रिया
BJP मुख्यालय में इन नेताओं का स्वागत करते हुए वरिष्ठ नेताओं ने इसे “विकास की जीत” बताया। वहीं, आम आदमी पार्टी ने इसे लोकतंत्र की हत्या और जांच एजेंसियों के दबाव में किया गया कृत्य करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राघव चड्ढा जैसे कद्दावर नेता का जाना AAP के लिए न केवल सदन में, बल्कि पंजाब और दिल्ली के आगामी चुनावों में भी भारी नुकसानदेह साबित हो सकता है।
फिलहाल, दिल्ली और पंजाब की राजनीति में इस उथल-पुथल का असर दिखने लगा है। यदि इन सांसदों की सदस्यता बरकरार रहती है, तो राज्यसभा में BJP की स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी, जिससे महत्वपूर्ण बिलों को पास कराना सरकार के लिए और भी आसान होगा।







