आगरा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ गृह क्लेश और कानूनी कार्यवाही के डर ने एक दंपति की जान ले ली। आगरा में तैनात सरकारी शिक्षिका पूजा सिंघल की आत्महत्या के कुछ ही घंटों बाद, उनके पति जितेंद्र गोयल ने भी लखनऊ के एक होटल में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस दोहरी आत्महत्या से दोनों परिवारों में कोहराम मच गया है।
आगरा में पूजा ने लगाया मौत को गले
घटना की शुरुआत आगरा से हुई, जहाँ 32 वर्षीय पूजा सिंघल एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से परिवार में गंभीर गृह क्लेश चल रहा था। इसी मानसिक तनाव के चलते पूजा ने अपने घर में फांसी का फंदा लगाकर जान दे दी।
मन्नत पूरी होने पर महिला ने काली मंदिर में जीभ काटकर चढ़ाई, अस्पताल में भर्ती।
पूजा की मौत के बाद उनके मायके पक्ष ने ससुरालियों पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए इसे ‘दहेज हत्या’ का मामला बताया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी थी।
दहेज हत्या का आरोप सुन पति ने लखनऊ में दी जान
पूजा की मौत और अपने खिलाफ दर्ज हुई दहेज हत्या की शिकायत की जानकारी जब उनके पति जितेंद्र गोयल (35) को मिली, तो वह गहरे सदमे और डर में चले गए। जितेंद्र, जो खुद एक स्कूल में हेडमास्टर के पद पर तैनात थे, उस वक्त लखनऊ में थे।
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जितेंद्र ने लखनऊ के चारबाग स्थित मयूर होटल में एक कमरा लिया और वहां फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। होटल स्टाफ की सूचना पर पहुंची पुलिस को जितेंद्र का शव फंदे से लटका मिला। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि पत्नी की मौत का दुख और पुलिस केस का डर उनकी आत्महत्या की मुख्य वजह बना।
एक साथ हुआ अंतिम संस्कार, जांच में जुटी पुलिस
इस दुखद घटना के बाद दोनों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।
- पारिवारिक कलह: पुलिस उन कारणों का पता लगा रही है जिनकी वजह से पूजा ने इतना बड़ा कदम उठाया।
- दहेज के आरोप: मायके पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और जितेंद्र के बैंक ट्रांजैक्शन की भी जांच की जा सकती है।
- सरकारी रिकॉर्ड: दोनों ही शिक्षा विभाग में सम्मानित पदों पर थे, ऐसे में विभाग के सहकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है।
मनोवैज्ञानिकों का मत: विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आवेश में आकर कदम उठाने के बजाय कानूनी और सामाजिक परामर्श की मदद लेनी चाहिए। गृह क्लेश और कानूनी मुकदमों का दबाव अक्सर व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है।
आगरा और लखनऊ पुलिस आपसी समन्वय के साथ मामले की कार्यवाही पूरी कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर समाज में बढ़ते पारिवारिक विवादों और उनके घातक परिणामों पर बहस छेड़ दी है।







