हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से आस्था और रोंगटे खड़े कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ के एक प्राचीन काली मंदिर में एक बुजुर्ग महिला श्रद्धालु ने अपनी मन्नत पूरी होने पर अपनी जीभ काटकर माता के चरणों में अर्पित कर दी। इस खौफनाक कदम के बाद महिला लहूलुहान होकर मंदिर परिसर में ही बेहोश हो गई, जिससे वहां मौजूद अन्य श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया।
पति के ठीक होने की मांगी थी मन्नत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला का नाम उषा बताया जा रहा है। परिजनों के मुताबिक, महिला के पति लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। महिला ने शहर के इस प्राचीन काली मंदिर में मन्नत मांगी थी कि यदि उसके पति स्वस्थ हो जाते हैं, तो वह अपनी जीभ माता को अर्पित करेगी।
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शुक्रवार को जब वह मंदिर पहुंची, तो उसने पूजा-अर्चना के बाद अचानक धारदार हथियार से अपनी जीभ काट ली। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि महिला ने जैसे ही जीभ काटी, वह दर्द से तड़पने लगी और कुछ ही क्षणों में बेहोश हो गई।
प्रशासन की सख्ती के बावजूद दोहराई गई परंपरा
शहर का यह प्राचीन काली मंदिर अपनी एक अजीबोगरीब और विचलित करने वाली परंपरा के लिए जाना जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहाँ मन्नत पूरी होने पर जीभ चढ़ाने से देवी प्रसन्न होती हैं।
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- इतिहास: पूर्व में भी यहाँ ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
- पुलिस का पहरा: प्रशासन ने कई साल पहले इस कुप्रथा को रोकने के लिए मंदिर परिसर में पुलिस बल तैनात किया था।
- चूक: कड़े पहरे और जागरूकता अभियानों के बावजूद, महिला श्रद्धालु गुप्त रूप से इस घटना को अंजाम देने में कामयाब रही।
अस्पताल में भर्ती, स्थिति अब स्थिर
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस की मदद से महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार, महिला का काफी खून बह चुका था, लेकिन समय पर इलाज मिलने के कारण अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
पुलिस का बयान: “हमें मंदिर में एक महिला द्वारा जीभ काटे जाने की सूचना मिली थी। तत्काल टीम भेजकर उसे उपचार दिलाया गया है। मंदिर समिति को फिर से निर्देशित किया गया है कि ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाए।”
आस्था और कानून के बीच बहस
यह घटना एक बार फिर समाज में व्याप्त गहरी आस्था और अंधविश्वास के बीच की बारीक रेखा पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली प्रथाएं कानूनन और मानवाधिकार के दृष्टिकोण से गलत हैं। फिलहाल, पूरे इलाके में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।







