पटना। बिहार पुलिस में अनुशासन और ‘धर्मनिरपेक्ष’ छवि को बनाए रखने के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार द्वारा जारी एक नए निर्देश ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। DGP ने स्पष्ट किया है कि ड्यूटी के दौरान पुलिस अधिकारी और कर्मचारी माथे पर चंदन, तिलक या कोई अन्य धार्मिक प्रतीक नहीं लगाएंगे। इस आदेश के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे हिंदू आस्था पर चोट बताते हुए मोर्चा खोल दिया है।
DGP का फरमान: अनुशासन और सोशल मीडिया पर सख्ती
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, वर्दी की गरिमा बनाए रखने के लिए कई कड़े नियम लागू किए गए हैं। DGP विनय कुमार ने सभी जिला मुख्यालयों को पत्र भेजकर कहा है कि:
- धार्मिक प्रतीकों पर रोक: पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान माथे पर तिलक या चंदन नहीं लगा सकेंगे।
- सोशल मीडिया पर पाबंदी: वर्दी पहनकर रील (Reels) बनाने या वीडियो पोस्ट करने वाले 50 से अधिक पुलिसकर्मियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
- साधारण लुक: महिला पुलिसकर्मियों को अत्यधिक मेकअप और गहने पहनने से बचने का निर्देश दिया गया है।
- उद्देश्य: विभाग का मानना है कि पुलिस को निष्पक्ष और पेशेवर दिखना चाहिए, जिससे जनता के बीच उसकी ‘सेकुलर’ छवि बनी रहे।
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भाजपा का पलटवार: “यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है”
DGP के इस फरमान पर भाजपा के फायरब्रांड नेता और विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए पुलिस प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
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बचौल ने कहा: “अगर चंदन और तिलक लगाने से पुलिस की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो क्या प्रशासन बुर्का पहनकर या लंबी दाढ़ी रखकर ड्यूटी करने वालों पर भी रोक लगाएगा? यह आदेश सिर्फ हिंदू प्रतीकों को निशाना बनाने के लिए है। तिलक हमारी संस्कृति और पहचान है।”
भाजपा नेताओं का तर्क है कि पुलिस नियमावली में अनुशासन जरूरी है, लेकिन किसी की व्यक्तिगत धार्मिक आस्था पर प्रहार करना गलत है।
पुलिस मुख्यालय की सफाई
विवाद बढ़ता देख पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पुलिस मैनुअल में पहले से मौजूद ड्रेस कोड का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। अधिकारियों का तर्क है कि वर्दी एक समान होनी चाहिए और उसमें किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत या धार्मिक जुड़ाव नहीं दिखना चाहिए ताकि फरियादी को पुलिसकर्मी निष्पक्ष नजर आए।
ताजा आंकड़े और स्थिति
हालिया कार्रवाई में बिहार पुलिस ने अनुशासनहीनता के आरोप में राज्यभर में 40 से 60 पुलिसकर्मियों पर गाज गिराई है। इसमें सबसे ज्यादा मामले सोशल मीडिया पर वर्दी का दुरुपयोग करने के हैं। हालाँकि, तिलक पर लगी रोक ने अब इस प्रशासनिक सुधार को राजनीतिक रंग दे दिया है।
अब देखना यह होगा कि विपक्षी दलों के बढ़ते दबाव के बीच क्या नीतीश सरकार इस आदेश पर दोबारा विचार करती है या पुलिस मुख्यालय अपने रुख पर कायम रहता है।







