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हाईकोर्ट का सख्त रुख फिर शुरू होंगे परिवहन चेक पोस्ट अंडरटेकिंग तोड़ने पर सरकार को चेतावनी

By: डिजिटल डेस्क

On: Friday, May 1, 2026 5:00 PM

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जबलपुर: मध्यप्रदेश में ओवरलोडेड ट्रकों की मनमानी और अवैध परिवहन पर लगाम लगाने के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रदेश की सीमाओं पर बंद किए गए सभी परिवहन चेक पोस्टों (परिवहन बैरियर) को आगामी 30 दिनों के भीतर पुनः क्रियाशील किया जाए।

‘अंडरटेकिंग’ का उल्लंघन बना ‘कोर्ट की अवमानना’

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने याद दिलाया कि पूर्व में सरकार ने स्वयं यह अंडरटेकिंग (वचनबद्धता) दी थी कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे और चेक पोस्ट संचालित रहेंगे। इसके बावजूद, चेक पोस्टों को बंद कर दिया गया, जिसे अदालत ने ‘न्यायालय की अवमानना’ (Contempt of Court) की श्रेणी में माना है।

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अदालत ने कहा, “जब सरकार न्यायालय के समक्ष कोई आश्वासन देती है, तो वह केवल एक औपचारिक बयान नहीं होता। उसका उल्लंघन न्यायपालिका की गरिमा को चुनौती देना है।”

ओवरलोडिंग से राजस्व की हानि और बढ़ते हादसे

न्यायालय ने इस बात पर चिंता जताई कि चेक पोस्ट बंद होने से न केवल सड़कों की हालत खराब हो रही है, बल्कि राज्य के राजस्व को भी करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है।

  • सुरक्षा का मुद्दा: ओवरलोडेड ट्रक सड़कों पर होने वाले जानलेवा हादसों का एक प्रमुख कारण हैं।
  • नियमों की धज्जियां: चेक पोस्ट न होने से परिवहन माफिया बिना किसी डर के क्षमता से अधिक माल ढो रहे हैं।

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30 दिन की समय सीमा और प्रशासन को अल्टीमेटम

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में समय सीमा तय करते हुए कहा है कि 30 दिनों के भीतर चेक पोस्टों पर कर्मचारियों की तैनाती और आवश्यक बुनियादी ढांचा दुरुस्त कर रिपोर्ट पेश की जाए। यदि तय समय में कार्य पूरा नहीं होता है, तो संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

क्या होगा असर?

इस फैसले के बाद अब परिवहन विभाग को युद्धस्तर पर तैयारी करनी होगी। प्रदेश की सीमाओं, विशेषकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र से लगे जिलों में फिर से सघन जांच शुरू होगी। इससे न केवल अवैध परिवहन पर लगाम लगेगी, बल्कि सरकार के खजाने में भी इजाफा होने की उम्मीद है।

परिवहन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यह फैसला सड़क सुरक्षा की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कोर्ट की इस सख्त डेडलाइन का पालन किस तरह सुनिश्चित करता है।

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