भारतीय मुद्रा (रुपया) में पिछले कुछ दिनों से जारी रिकॉर्ड गिरावट ने देश के वित्तीय गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हरकत में आता दिख रहा है। वित्तीय बाजार के सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक रुपए को स्थिरता देने के लिए अपने सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Interest Rate Hike) जैसा सख्त और अप्रत्याशित कदम भी शामिल है।
इस खबर के सामने आने के बाद शेयर बाजार और विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार के विश्लेषक आगामी मौद्रिक नीतियों और आरबीआई के अगले कदमों पर करीब से नजर गड़ाए हुए हैं।
डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
वैश्विक मोर्चे पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण भारतीय रुपए पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हफ्ते के कारोबारी सत्रों के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया टूटकर लगभग 96.9 के सर्वकालिक निचले स्तर (All-Time Low) पर पहुंच गया था। हालांकि, आरबीआई की संभावित सख्ती की खबरों के बीच आज शुरुआती कारोबार में रुपए में मामूली सुधार देखा गया और यह 96.3 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। लेकिन बाजार में अभी भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
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इन सख्त विकल्पों पर विचार कर रहा है केंद्रीय बैंक
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की कई दौर की आंतरिक बैठकें हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से तीन बड़े कदमों पर विचार कर रहा है:
- ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Rate Hike): बाजार से अतिरिक्त नकदी को सोखने और रुपए को आकर्षक बनाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विकल्प सबसे ऊपर है। हालांकि अगली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक जून के पहले हफ्ते में निर्धारित है, लेकिन जानकार मान रहे हैं कि स्थिति बिगड़ने पर आरबीआई समय से पहले (Out-of-cycle adjustment) भी फैसला ले सकता है।
- एनआरआई डिपॉजिट स्कीम (NRI Deposit Schemes): साल 2013 के ‘टेपर टेंट्रम’ संकट की तरह, आरबीआई अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए बैंकों के माध्यम से एक विशेष जमा योजना शुरू कर सकता है। अधिकारियों का अनुमान है कि इस कदम से देश में लगभग 50 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आ सकता है।
- सॉवरेन डॉलर बॉन्ड (Sovereign Dollar Bond): विदेशी निवेशकों से सीधे डॉलर जुटाने के लिए सरकार के साथ मिलकर सॉवरेन बॉन्ड जारी करने पर भी चर्चा चल रही है।
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क्यों टूट रहा है रुपया?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। तेल का आयात बिल बढ़ने के कारण देश में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार की जा रही बिकवाली ने भी रुपए की कमर तोड़ दी है। अकेले पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने करीब ₹1,597 करोड़ मूल्य की संपत्तियां बेची हैं।
विशेषज्ञों की राय और बाजार पर असर
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यद्यपि भारत के बुनियादी आर्थिक आंकड़े (Economic Fundamentals) मजबूत हैं और बैंकिंग प्रणाली सुरक्षित है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण रुपए में अनुमान से अधिक तेजी से गिरावट आई है। यदि आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो बाजार में नकदी कम होगी जिससे रुपए को तो मजबूती मिलेगी, लेकिन आम जनता के लिए होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो सकते हैं।






