सिंगरौली जिले के वैढ़न स्थित न्यायालय ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अपराध का संज्ञान लिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) मुख्यालय वैढ़न, केशव कुमार की अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला पाए जाने पर आरोपी को अदालत में उपस्थित होने के लिए समंस जारी करने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से अधिवक्ता डी. के. सोनी उपस्थित हुए। अदालत के समक्ष परिवादी द्वारा मूल चेक, बैंक संबंधित दस्तावेज और अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने मूल चेक का मिलान उसकी फोटोकॉपी से करने के बाद मूल दस्तावेज परिवादी पक्ष को वापस सौंप दिया और इसकी विधिवत पावती भी रिकॉर्ड पर ली गई।
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कोर्ट फीस और शपथ पत्र प्रस्तुत
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि परिवादी द्वारा नियमानुसार 7,800 रुपये की कोर्ट फीस ऑनलाइन माध्यम से जमा की गई है और उसकी रसीद न्यायालय में प्रस्तुत की गई। इसके अतिरिक्त परिवादी ने एक शपथ पत्र और घोषणा पत्र भी दाखिल किया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि संबंधित विवाद को किसी अन्य न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
डिजिटल साक्ष्यों की प्रमाणिकता साबित होना जरूरी, आरोपी नियमित जमानत
न्यायालय ने दस्तावेजों के अवलोकन के बाद माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत अपराध बनता है। इसके बाद अदालत ने मामले को दांडिक पंजी और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में दर्ज करने का निर्देश दिया।
आरोपी को भेजा जाएगा समंस
अदालत ने परिवादी को निर्देशित किया है कि वह पांच कार्य दिवसों के भीतर आदेशिका शुल्क (Process Fee) जमा करे। शुल्क जमा होने के बाद आरोपी को साधारण डाक और रजिस्टर्ड पोस्ट के माध्यम से समंस जारी किया जाएगा, ताकि उसकी न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, धारा 138 के मामलों में समंस जारी होना यह दर्शाता है कि अदालत को प्रारंभिक स्तर पर आरोपों में पर्याप्त आधार दिखाई दिया है। ऐसे मामलों में यदि आरोपी तय समय पर अदालत में उपस्थित नहीं होता है तो आगे कठोर कानूनी कार्रवाई भी संभव हो सकती है।
समझौते का रास्ता भी खुला
न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय दामोदर एस. प्रभु बनाम सैयद बाबालाल (AIR 2010 SC 1907) का हवाला देते हुए यह भी कहा कि यदि आरोपी प्रारंभिक चरण में समझौता करना चाहता है तो वह आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बाद के चरणों में समझौते पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित अतिरिक्त शर्तें लागू हो सकती हैं।
29 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है। इसी दिन आरोपी की उपस्थिति और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सुनवाई होगी।
देशभर में चेक बाउंस से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय पर न्यायिक कार्रवाई वित्तीय लेन-देन में विश्वास बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।







