सिंगरौली (बैढ़न)न्याय और कानून के रक्षकों पर जब संगीन आरोप लगते हैं, तो न्यायपालिका का रुख और भी कड़ा हो जाता है। ऐसा ही एक मामला सिंगरौली जिले से सामने आया है, जहाँ द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीमती कंचन गुप्ता की अदालत ने फॉरेस्ट गार्ड राकेश चर्मकार की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। आरोपी पर एक महिला का शारीरिक शोषण करने और धोखे से उसका गर्भपात कराने जैसे रूह कंपा देने वाले आरोप हैं।
क्या है पूरा विवाद?
आरोपी राकेश चर्मकार (33), जो वर्तमान में चितरंगी वनपरिक्षेत्र में तैनात है, पर आरोप है कि उसने एक महिला को शादी का सपना दिखाकर लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण किया। पीड़िता का दावा है कि जब वह गर्भवती हुई, तो आरोपी ने शादी करने के बजाय उसे नशीली दवा खिला दी, जिससे उसका जबरन गर्भपात हो गया।
BOI भोपाल लोन घोटाला बैंक मैनेजर और साथी को 7-7 साल की जेल
अदालत में दलीलों का दौर
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने खुद को निर्दोष बताते हुए दलील दी कि पीड़िता उसे ‘ब्लैकमेल’ कर रही है। बचाव पक्ष के अनुसार:
- वर्ष 2019 में दोनों के बीच विवाह की बात चली थी, जो पारिवारिक कारणों से टूट गई।
- बाद में दोनों की अलग-अलग शादियाँ हो गईं।
- आरोपी का दावा है कि विधवा होने के बाद पीड़िता ने उससे संपर्क साधा और आर्थिक मदद के नाम पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।
₹49,999 में मिल रहा Samsung S24 5G, स्मार्टफोन्स पर भारी गिरावट
न्यायालय की तल्ख टिप्पणी
अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को पर्याप्त नहीं माना। पीड़िता द्वारा प्रस्तुत लीगल नोटिस और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने पाया कि आरोप केवल शारीरिक संबंध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें लैंगिक उत्पीड़न और जबरन गर्भपात जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
शासकीय अधिवक्ता श्री पी. के. नापित ने जमानत का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में रियायत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत के लिए औपचारिक एफआईआर का होना जरूरी नहीं है; यदि गिरफ्तारी की आशंका और आरोपों में सच्चाई की गुंजाइश है, तो मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए।
“आरोपों की प्रकृति अत्यंत गंभीर है। महिला की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े इस मामले में विस्तृत न्यायिक जांच की आवश्यकता है, अतः अग्रिम जमानत का आधार नहीं बनता।” — अदालत का निष्कर्ष
अब क्या होगा
अग्रिम जमानत याचिका (धारा 482 BNSS) खारिज होने के बाद अब आरोपी फॉरेस्ट गार्ड पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। यह आदेश उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर महिलाओं का शोषण करते हैं। सिंगरौली पुलिस अब इस मामले में औपचारिक जांच को आगे बढ़ा सकती है।







