दुबई/वॉशिंगटन-मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी नौसेना द्वारा एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज को जब्त किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस घटना ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले तेल बाजार को भी हिला कर रख दिया है।
क्या है पूरा मामला
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के अनुसार, ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों ने एक संदिग्ध ईरानी जहाज को रोका और उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। दूसरी ओर, तेहरान ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” करार दिया है और चेतावनी दी है कि वे इसका “कड़ा और निर्णायक” जवाब देंगे।
वैश्विक तेल बाजार और भारत पर असर
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस तनाव की खबर फैलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल देखा गया है।
भारत के लिए यह खबर चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार, इस अस्थिरता के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में एलपीजी (LPG) की खपत में 13% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान जवाबी कार्रवाई के रूप में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश करता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए आपदा जैसा होगा। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से शांति की अपील कर रहा है ताकि एक और बड़े युद्ध को टाला जा सके।






