नई दिल्ली–भारत के पारंपरिक शिल्प और आधुनिक तकनीक के बीच की दूरी अब मिटने लगी है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने आज एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बताया कि ‘PM विश्वकर्मा योजना’ के तहत अब तक 2,500 से अधिक पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का उपयोग करने के लिए सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा चुका है।
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क्या है यह पहल?
यह अनूठी पहल प्रधानमंत्री के ‘AI for Social Good’ विजन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य घास-फूस के स्तर पर काम करने वाले उद्यमियों और कारीगरों को डिजिटल युग की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को ChatGPT, Indus और Google Gemini जैसे आधुनिक प्लेटफार्मों का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया।
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प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु और आंकड़े
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस कार्यक्रम ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी पहुंच बनाई है:
- सर्वाधिक भागीदारी- तेलंगाना (387), महाराष्ट्र (295), गुजरात (262) और राजस्थान (251) जैसे राज्यों से सबसे अधिक कारीगर सामने आए।
- मुख्य कौशल- कारीगरों को AI की मदद से प्रोडक्ट डिजाइन, ब्रांडिंग, डिजिटल पैकेजिंग और मार्केटिंग रणनीतियां बनाना सिखाया गया।
- व्यापार में लाभ- अब ये कारीगर खुद ही अपने उत्पादों के लिए हाई-क्वालिटी कंटेंट और विवरण (Product Descriptions) तैयार कर सकते हैं, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगी धमक
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के 7.5 करोड़ से अधिक MSME देश की जीडीपी में लगभग 30% का योगदान देते हैं। AI के समावेश से इन छोटे व्यवसायों की दक्षता में 20-25% की वृद्धि होने की संभावना है। MSME मंत्रालय का लक्ष्य है कि आने वाले समय में तकनीक के माध्यम से पारंपरिक उत्पादों की वैल्यू बढ़ाकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों (जैसे Amazon Global या Etsy) तक पहुँचाया जाए।यह कदम न केवल ‘डिजिटल डिवाइड’ को कम करेगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया 2.0’ को एक नई बौद्धिक शक्ति भी प्रदान करेगा।







