जयपुर (राजस्थान): राजस्थान की वीर धरा एक बार फिर अपने सीने में दबे रहस्यों को लेकर सुर्खियों में है। राज्य के एक सुदूर इलाके में स्थित सदियों पुराने किले के पास एक ऐसी ‘गुप्त गुफा’ का पता चला है, जिसे स्थानीय लोग ‘शापित’ मानकर उससे दूरी बनाए रखते थे। लेकिन आज जब पुरातत्व विभाग (Archaeology Department) की टीम ने सुरक्षा घेरे में इसकी जांच शुरू की, तो वहां से मिले खजाने ने विशेषज्ञों के भी होश उड़ा दिए।
सदियों से था ‘शाप’ का खौफ
स्थानीय निवासियों और बुजुर्गों के अनुसार, यह गुफा लगभग 500 साल पुरानी है। लोक कथाओं में प्रचलित था कि इस गुफा की रक्षा ‘अदृश्य शक्तियां’ करती हैं और जो भी इसके अंदर गया, वह कभी वापस नहीं आया। इसी डर के कारण दशकों से ग्रामीण इसके पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। हालांकि, हाल ही में हुई कुछ भूगर्भीय हलचल और मिट्टी धंसने के कारण गुफा का मुख्य द्वार आंशिक रूप से दिखाई देने लगा, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
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क्या-क्या मिला खजाने में?
पुरातत्व विभाग की प्रारंभिक खुदाई और जांच में जो चीजें बरामद हुई हैं, उनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।
- प्राचीन सिक्के: गुफा के अंदर से तांबे और चांदी के साथ-साथ सोने के सिक्के मिले हैं, जिन पर मध्यकालीन राजघरानों की मुहर लगी है।
- कीमती मूर्तियां: पत्थर और अष्टधातु से बनी कुछ प्राचीन मूर्तियां भी मिली हैं, जो उस दौर की उत्कृष्ट वास्तुकला का प्रमाण हैं।
- दस्तावेज: कुछ हस्तलिखित पांडुलिपियां (Manuscripts) भी बरामद हुई हैं, जो संभवतः उस समय के गुप्त सैन्य रास्तों या व्यापारिक समझौतों से जुड़ी हो सकती हैं।
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रहस्य या ऐतिहासिक खोज?
खजाना मिलने की खबर आग की तरह फैलते ही किले के आसपास हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोग इसे ‘चमत्कार’ मान रहे हैं, वहीं पुरातत्वविदों का कहना है कि यह कोई रहस्यमयी शाप नहीं, बल्कि युद्ध या आक्रमण के समय राजघरानों द्वारा अपनी संपत्ति सुरक्षित रखने का एक ‘गुप्त तहखाना’ मात्र है।
सांख्यिकी और तथ्य:
- अनुमानित काल: 15वीं-16वीं शताब्दी (लगभग 500 वर्ष पुराना)।
- बरामद सिक्के: करीब 250 से अधिक स्वर्ण और रजत मुद्राएं।
- सुरक्षा: पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और ‘ट्रेजर ट्रोव एक्ट’ (Treasure Trove Act) के तहत खजाने को सरकारी खजाने में जमा कराया जा रहा है।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों या ‘शाप’ जैसी बातों पर ध्यान न दें। विभाग अब इस गुफा की कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) और गहन वैज्ञानिक जांच की तैयारी कर रहा है, जिससे राजस्थान के इतिहास का कोई नया और अनसुना अध्याय सामने आ सके।







