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यहाँ मिली ‘हीरे की बारिश’ वाली अद्भुत दुनिया इसरो और नासा के पास आई तस्वीर 

By: डिजिटल डेस्क

On: Saturday, April 11, 2026 12:53 PM

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श्रीहरिकोटा/वाशिंगटन: ब्रह्मांड के रहस्य हमेशा से ही मानव सभ्यता को अचंभित करते रहे हैं, लेकिन हाल ही में अंतरिक्ष से आई एक खबर ने विज्ञान जगत में सनसनी फैला दी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) के बीच बढ़ते तकनीकी सहयोग और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के ताजा डेटा ने एक ऐसे ‘असंभव’ लगने वाले ग्रह की पुष्टि की है, जहाँ का वातावरण कार्बन से इतना समृद्ध है कि वहाँ ‘हीरे की बारिश’ (Diamond Rain) होती है।

नींबू के आकार का अनोखा ग्रह: PSR J2322-2650b

इस अद्भुत एक्सोप्लैनेट का नाम PSR J2322-2650b रखा गया है। यह पृथ्वी से काफी दूर एक तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन तारे (Pulsar) की परिक्रमा कर रहा है। आज जारी की गई तस्वीरों और स्पेक्ट्रल एनालिसिस (Spectral Analysis) ने इस ग्रह की तीन सबसे बड़ी चौंकाने वाली विशेषताएं बताई हैं:

  1. अजीबोगरीब आकार: अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण यह ग्रह गोल नहीं, बल्कि एक ‘नींबू’ (Lemon-shaped) की तरह खिंच गया है।
  2. कार्बन का भंडार: जहाँ अन्य ग्रहों के वायुमंडल में ऑक्सीजन या नाइट्रोजन की प्रधानता होती है, यहाँ का आसमान शुद्ध कार्बन के बादलों से भरा है।
  3. हीरों की वर्षा: वैज्ञानिकों के अनुसार, इस ग्रह के केंद्र की ओर बढ़ते ही दबाव (Pressure) इतना अधिक हो जाता है कि वातावरण में मौजूद कार्बन क्रिस्टलाइज होकर हीरों में बदल जाता है और बारिश की तरह सतह की ओर गिरता है।

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ISRO और NASA का बढ़ता डिजिटल सहयोग

हालाँकि प्राथमिक डेटा जेम्स वेब टेलीस्कोप से मिला है, लेकिन इसरो (ISRO) के ग्राउंड स्टेशंस और ‘निसार’ (NISAR) जैसे साझा मिशनों के जरिए प्राप्त डेटा प्रोसेसिंग तकनीकों ने इस खोज के सत्यापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अप्रैल 2026 में अंतरिक्ष यात्रियों की चंद्रमा से सफल वापसी के बीच इस खोज ने भारत और अमेरिका के अंतरिक्ष संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है।

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खोज के मुख्य तथ्य और सांख्यिकी:

  • दूरी: यह ग्रह अपने तारे से मात्र 1.6 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर है।
  • परिक्रमा समय: यह ग्रह महज 7.8 घंटे में अपने तारे का एक चक्कर पूरा कर लेता है।
  • संरचना: इसमें हीलियम और कार्बन की भारी मात्रा पाई गई है, जो इसे सौरमंडल के किसी भी ग्रह से अलग बनाती है।

क्यों खास है यह खोज?

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के मुख्य शोधकर्ता माइकल झांग के अनुसार, “यह खोज ग्रहों के बनने के स्थापित सिद्धांतों को चुनौती देती है। हम अब तक केवल यूरेनस और नेपच्यून के भीतर ऐसी प्रक्रिया की कल्पना करते थे, लेकिन एक पूरे ग्रह का ‘डायमंड-रिच’ होना हमारी समझ से परे है।” सोशल मीडिया पर #WonderOfUniverse हैशटैग के साथ इस ग्रह की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसे लोग ‘स्वर्ग का खजाना’ कह रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि अत्यधिक दबाव और तापमान में पदार्थ किस तरह व्यवहार करते हैं। क्या भविष्य में हम इन हीरों तक पहुँच पाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल यह खोज मानवता के लिए किसी रोमांचक सपने से कम नहीं है।

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