नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों पेंशनभोगियों और वरिष्ठ नागरिकों को नए वित्त वर्ष (2026-27) में एक ऐतिहासिक तोहफा दिया है। सरकार ने बजट घोषणाओं को लागू करते हुए वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) की सीमा को ₹50,000 से बढ़ाकर सीधा ₹1,00,000 कर दिया है। यह फैसला विशेष रूप से उन बुजुर्गों के लिए जीवन सुगम बनाने की दिशा में लिया गया है जो अपनी पेंशन पर निर्भर हैं।
बुजुर्गों के हाथ में बचेगा अधिक पैसा
स्टैंडर्ड डिडक्शन वह राशि होती है जिसे टैक्स गणना से पहले कुल आय में से सीधे घटा दिया जाता है। इस सीमा के बढ़ने का मतलब है कि अब वरिष्ठ नागरिकों की पेंशन या वेतन आय का ₹1 लाख का हिस्सा पूरी तरह टैक्स मुक्त होगा।
- बचत का गणित: पहले जहाँ ₹50,000 तक की कटौती मिलती थी, अब ₹1 लाख की कटौती मिलने से पेंशनभोगियों की कर योग्य आय कम हो जाएगी। इससे मध्यम आय वर्ग के बुजुर्गों को सालाना हजारों रुपये की सीधी टैक्स बचत होगी।
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चिकित्सा और अन्य जरूरतों में मिलेगी मदद
रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा खर्च स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं पर होता है। सरकार का मानना है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने से बुजुर्गों के पास खर्च करने योग्य आय (Disposable Income) बढ़ेगी। इससे उन्हें बढ़ती महंगाई और चिकित्सा खर्चों को मैनेज करने में बड़ी राहत मिलेगी।
पेंशनभोगियों के लिए ताजा टैक्स अपडेट (वित्त वर्ष 2026-27):
| विवरण | पुरानी सीमा | नई सीमा |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) | ₹50,000 | ₹1,00,000 |
| सेक्शन 80TTB (ब्याज पर छूट) | ₹50,000 | ₹1,00,000 (प्रस्तावित/संरेखित) |
| बेसिक एग्जेंप्शन (New Regime) | ₹3,00,000 | ₹4,00,000 |
क्या हैं अन्य महत्वपूर्ण बदलाव?
केवल स्टैंडर्ड डिडक्शन ही नहीं, सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए TDS (Tax Deducted at Source) के नियमों में भी नरमी बरती है। अब बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और अन्य ब्याज आय पर टैक्स कटौती की सीमा को भी सेक्शन 80TTB के साथ संरेखित (Align) किया जा रहा है। इसके अलावा, 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए आईटीआर (ITR) फाइलिंग से छूट की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है।
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विशेषज्ञों की राय
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल वरिष्ठ नागरिकों की क्रय शक्ति बढ़ाएगा, बल्कि अर्थव्यवस्था में खपत (Consumption) को भी बढ़ावा देगा। “यह बुजुर्गों के प्रति एक सम्मानजनक और व्यावहारिक कदम है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहने में मदद मिलेगी।”







