उत्तर प्रदेश के Mirzapur में चर्चित अधिवक्ता राजीव सिंह हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। 11 अप्रैल 2026 की सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले अधिवक्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही हमलावर फरार हो गए।
81 सेकंड में वारदात CCTV में कैद पूरी घटना
प्रारंभिक जांच और सामने आए वीडियो फुटेज के अनुसार, पूरी वारदात महज 81 सेकंड में अंजाम दी गई। आरोपी ने नजदीक से तमंचे से फायर कर अधिवक्ता की हत्या की और साथी के साथ बाइक से फरार हो गया।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के लिए आरोपियों की पहचान आसान हो गई, जिससे जांच में तेजी आई।
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पुलिस का एक्शन मुठभेड़ में मुख्य आरोपी गिरफ्तार
हत्या के करीब 15 घंटे के भीतर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी राजेंद्र सोनकर को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया। यह मुठभेड़ बरौधा क्षेत्र के पास हुई, जहां पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ने की कोशिश की।
मुठभेड़ के दौरान आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर अस्पताल भेजा गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी के पास से हथियार भी बरामद किए गए हैं।
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हत्या के पीछे क्या था कारण? जांच जारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हत्या के पीछे पुरानी रंजिश और व्यक्तिगत विवाद की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक आरोपी और मृतक एक-दूसरे को पहले से जानते थे, जिससे मामले को और संवेदनशील माना जा रहा है।
वकीलों में आक्रोश, सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद मिर्जापुर के वकील समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिला। अधिवक्ताओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भी प्रदर्शन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग न्याय की मांग को लेकर जुटे।
कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल
लगातार हो रही ऐसी घटनाएं प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। खासतौर पर दिनदहाड़े और सार्वजनिक स्थान पर हुई इस हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है।
पुलिस का दावा है कि मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा।
त्वरित कार्रवाई, लेकिन चुनौती बरकरार
मिर्जापुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी जरूर हुई है, लेकिन यह मामला बताता है कि अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही है।
अब चुनौती सिर्फ आरोपियों को पकड़ने की नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने की है ताकि आम नागरिक और न्याय व्यवस्था से जुड़े लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।







