अनुगुल-ओडिशा के अनुगुल जिले की एक विशेष अदालत ने मानवता को झकझोर देने वाले एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को अनुगुल स्पेशल जिला कोर्ट ने मार्च 2025 में एक 4 साल की मासूम बच्ची के साथ जघन्य दुष्कर्म और उसकी हत्या के दोषी बाबुला जेना (40) को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई।
पोक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत की जस्टिस सौम्या सुभदर्शिनी ने इस कृत्य को ‘रैरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभतम से दुर्लभ) श्रेणी का करार दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह हृदयविदारक घटना 13 मार्च 2025 की है। अनुगुल के इंडस्ट्रियल थाना क्षेत्र में रहने वाली 4 साल 10 महीने की मासूम बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी, तभी वह अचानक लापता हो गई। परिजनों की काफी तलाश के बाद भी जब वह नहीं मिली, तो 14 मार्च को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
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15 मार्च 2025 की सुबह, बच्ची का शव घर से महज 200 मीटर दूर एक पेड़ के नीचे क्षत-विक्षत अवस्था में मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बच्ची के साथ न केवल दरिंदगी की गई थी, बल्कि गला दबाकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 17 मार्च 2025 को आरोपी बाबुला जेना को गिरफ्तार कर लिया था।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए जस्टिस सौम्या सुभदर्शिनी भावुक और सख्त नजर आईं। उन्होंने अपने आदेश में उल्लेख किया कि:”बच्चों के साथ दुष्कर्म के मामले विकृत यौन इच्छाओं का परिणाम हैं, जहां अपनी हवस के लिए मासूमों तक को नहीं बख्शा जाता। यह कृत्य मानवता के खिलाफ अपराध है और दोषी समाज के लिए एक बड़ा खतरा है।”अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उसने एक ऐसी मासूम की जान ली जो अपना बचाव करने में भी सक्षम नहीं थी।
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मुख्य सांख्यिकी और तथ्य
- मामला संख्या: विशेष पोक्सो केस नंबर 16/2025।
- सजा का आधार: भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी पाया गया।
- मुआवजा: अदालत ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
- त्वरित न्याय: पुलिस ने घटना के मात्र 4 दिनों के भीतर आरोपी को दबोच लिया था और एक साल के भीतर ट्रायल पूरा कर सजा सुनाई गई।
ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने अनुगुल पुलिस और वैज्ञानिक जांच टीम की सराहना की है, जिनकी सटीक और समयबद्ध जांच के कारण दोषी को उसके अंजाम तक पहुँचाया जा सका। इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है और इसे न्याय की जीत बताया है।







