लखनऊ-देश की सुरक्षा और अखंडता को चुनौती देने वाली एक बड़ी आतंकी साजिश के मामले में विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने अलकायदा की भारतीय शाखा ‘अंसार गजवातुल हिन्द’ (AGH) से जुड़े तीन आतंकियों मुशीरुद्दीन, मिनहाज अहमद और तौहीद अहमद शाह को आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का दोषी करार दिया है।
साजिश का खुलासा: 15 अगस्त को दहलाने का था प्लान
इस पूरे मामले की जड़ें 11 जुलाई 2021 से जुड़ी हैं, जब उत्तर प्रदेश एटीएस (UP ATS) ने लखनऊ के काकोरी इलाके में एक घर पर छापेमारी की थी। वहां से मिनहाज अहमद और मुशीरुद्दीन की गिरफ्तारी के साथ ही एक भयानक योजना का पर्दाफाश हुआ।
- ये आतंकी 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) से पहले लखनऊ समेत यूपी के कई प्रमुख शहरों के भीड़भाड़ वाले इलाकों में आत्मघाती हमले और सिलसिलेवार विस्फोट करने की तैयारी में थे।
- छापेमारी के दौरान इनके पास से चालू हालत में प्रेशर कुकर बम (IED), विस्फोटक पाउडर, एक पिस्टल और भारी मात्रा में आतंकी साहित्य बरामद किया गया था।
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विदेशी हैंडलर और भर्ती का नेटवर्क
एनआईए की जांच (मामला संख्या RC-02/2021/NIA/LKW) में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बैठे अलकायदा के हैंडलर उमर हलमंडी के इशारे पर काम कर रहा था।
- मिनहाज अहमद: यह विदेशी हैंडलर के सीधे संपर्क में था और बम बनाने व हथियार जुटाने का मुख्य जिम्मेदार था।
- मुशीरुद्दीन: इसने विस्फोटक सामग्री का भंडारण किया था और हमलों के लिए संभावित जगहों की रेकी की थी।
- तौहीद अहमद शाह: कश्मीर निवासी तौहीद इस मॉड्यूल का ‘भर्तीकर्ता’ था। उसने युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर ‘गजवा-ए-हिंद’ के एजेंडे से जोड़ने का काम किया।
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अदालत में पेश किए गए अहम सबूत
एनआईए ने अदालत के सामने तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों का मजबूत पुलिंदा रखा, जिसे झुठलाना नामुमकिन था:
- डिजिटल सबूत: मोबाइल फोन से टेलीग्राम और व्हाट्सएप चैट बरामद हुए, जिनमें कोड भाषा में बम बनाने की विधि और टारगेट लिस्ट साझा की गई थी।
- वित्तीय साक्ष्य: आरोपियों के बैंक खातों में संदिग्ध विदेशी फंडिंग के प्रमाण मिले।
- फॉरेंसिक रिपोर्ट: जब्त किए गए आईईडी और रसायनों की फॉरेंसिक जांच ने पुष्टि की कि ये बड़े पैमाने पर तबाही मचाने में सक्षम थे।
दोषियों की भूमिका एक नजर में
| दोषी का नाम | मुख्य आरोप एवं भूमिका |
| मिनहाज अहमद | मास्टरमाइंड, आईईडी निर्माण और विदेशी हैंडलर से डिजिटल संचार। |
| मुशीरुद्दीन | लॉजिस्टिक सपोर्ट, विस्फोटक भंडारण और रेकी। |
| तौहीद अहमद शाह | युवाओं का ब्रेनवाश करना और आतंकी स्लीपर सेल तैयार करना। |
विशेष अदालत ने इन तीनों को UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) और विस्फोटक अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया है। इस फैसले को आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बड़ी जीत माना जा रहा है। अदालत जल्द ही दोषियों के लिए सजा का ऐलान करेगी, जिसमें अधिकतम उम्रकैद का प्रावधान है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते इन गिरफ्तारियों ने एक बड़े रक्तपात को टाल दिया, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता था।
यह रिपोर्ट एनआईए की आधिकारिक चार्जशीट और अदालती कार्यवाही के तथ्यों पर आधारित है।







