श्रीनगर- जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने घाटी की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने प्रतिबंधित संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी’ से संबद्ध 58 निजी स्कूलों को आधिकारिक रूप से अपने नियंत्रण में लेने का आदेश जारी किया है। प्रशासन का तर्क है कि यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संदिग्ध वैचारिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अनिवार्य था।
उत्तरी कश्मीर पर विशेष फोकस
इन 58 स्कूलों में से अधिकांश उत्तरी कश्मीर के जिलों (बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा) में स्थित हैं। ये स्कूल मुख्य रूप से ‘फलाह-ए-आम ट्रस्ट’ (FAT) द्वारा संचालित किए जा रहे थे, जिसे सरकार ने पहले ही जांच के दायरे में रखा था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन स्कूलों में हजारों छात्र नामांकित हैं, जिनकी शिक्षा अब सीधे स्कूल शिक्षा विभाग (DSEK) की देखरेख में होगी।
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क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से इन संस्थानों की फंडिंग और पाठ्यक्रम को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। सरकार का मानना है कि निजी प्रबंधन के तहत इन स्कूलों में ऐसी गतिविधियां संचालित होने की संभावना थी जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव के विपरीत हो सकती हैं।
मुख्य बदलाव और सांख्यिकी
- प्रबंधन-अब इन स्कूलों का वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन सरकारी अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।
- शिक्षक-शिक्षकों की योग्यता की जांच की जाएगी और उन्हें सरकारी मानदंडों के अनुरूप ढाला जाएगा।
- पारदर्शिता-स्कूलों को मिलने वाले दान और खर्च का ऑडिट अब सरकारी ऑडिटर्स करेंगे।
छात्रों के भविष्य पर असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव से छात्रों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। सत्र 2026 के लिए पाठ्यक्रम को सरकारी स्कूलों के समान सुव्यवस्थित किया जाएगा। स्थानीय निवासियों ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ने से इन छात्रों के लिए भविष्य में सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे।यह कार्रवाई राज्य में अलगाववादी बुनियादी ढांचे को कमजोर करने और एक एकीकृत शिक्षा प्रणाली स्थापित करने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।







