मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिला न्यायालय (मुख्यालय बैढ़न) से आबकारी कानून से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) श्रीमती तनु गुप्ता की अदालत ने अवैध महुआ शराब रखने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह फैसला 27 मई 2026 को खुले न्यायालय में सुनाया गया।
मामला जिले के लंघाडोल थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने वर्ष 2022 में कार्रवाई करते हुए आरोपी भगतसिंह गौंड को अवैध शराब के साथ गिरफ्तार किया था। अभियोजन के अनुसार, 24 मई 2022 को शाम करीब 7:10 बजे ग्राम बजौडी में पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ा था। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 10 लीटर देशी हाथ भट्टी से बनी महुआ शराब बरामद हुई थी।
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बिना लाइसेंस रखी थी महुआ शराब
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी के पास शराब रखने का कोई वैध लाइसेंस या अनुज्ञप्ति नहीं थी। इसके बाद लंघाडोल थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर क्रमांक 166/2022 दर्ज कर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) के तहत मामला कायम किया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
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अदालत में आरोपी ने स्वीकार किया अपराध
सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जानकारी दी और कानूनी परिणाम समझाए। इसके बाद आरोपी भगतसिंह गौंड ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपी की स्वीकारोक्ति बिना किसी दबाव, भय या प्रलोभन के की गई प्रतीत होती है।
JMFC श्रीमती तनु गुप्ता ने कहा कि जब आरोपी ने स्वयं अपराध स्वीकार कर लिया है और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य भी अभियोजन के पक्ष में हैं, तब दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है।
अदालत ने सुनाई यह सजा
न्यायालय ने आरोपी को धारा 34(1) आबकारी अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए “न्यायालय उठने तक का कारावास” (Till Rising of Court) और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही आदेश दिया गया कि यदि आरोपी जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त 15 दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा।
जब्त शराब नष्ट करने का आदेश
अदालत ने अपने अंतिम आदेश में यह भी निर्देश दिया कि मामले में जब्त की गई 10 लीटर अवैध महुआ शराब को नियमानुसार पूरी तरह नष्ट किया जाए।
अवैध शराब पर लगातार कार्रवाई
मध्यप्रदेश के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ शराब से जुड़े मामलों में पुलिस और आबकारी विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। राज्य में अवैध शराब कारोबार को रोकने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषसिद्धि से अवैध शराब कारोबार पर नियंत्रण लगाने में मदद मिल सकती है।







